Wednesday, March 16, 2022

परमवीर चक्र क्या है What is Paramveer Chakra

रक्षा सेनाओं के लिए उच्चतम शौर्य सम्मान परम वीर चक्र (पी.वी.सी.) की स्थापना हमारे प्रथम गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को की गई। यह सम्मान जल, थल एवं वायु में शत्रु पक्ष का सामना होने पर दिखाई गई विशिष्ट वीरता या आत्म बलिदान के साहसिक अथवा महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रदान किया जाता है। यह सम्मान मरणोपरांत भी दिया जाता है। वैधानिक रूप से यह 15 अगस्त 1947 से प्रभावी माना गया। 


परम वीर चक्र का शाब्दिक अर्थ है 'वीरों' में सर्वोत्तम को दिया जाने वाला चक्र या अलंकार। संस्कृत में परम का अर्थ है सर्वोकृष्ट, वीर का अर्थ है साहसी और चक्र का अर्थ है पहिया। 


पदक की बनावट 


पदक–गोलाकार, कांस्य निर्मित, 1.38 इंच का व्यास और अग्रभाग पर केंद्र में उभरे हुए राष्ट्र चिह्न के साथ इन्द्र के वज्र की चार प्रतिकृतियाँ होती हैं। इसके पृष्ठभाग पर दो कमल के फूलों के साथ हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में परम वीर चक्र उभरा हुआ अंकित होता है। इसकी फ़िटिंग घुमाऊ उभार युक्त होती है। 


भारत में परम वीर चक्र ‘यूनाइटेड किंगडम' के विक्टोरिया क्रॉस तथा 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका' के पदक ऑफ़ ऑनर के बराबर है। 


परम वीर चक्र पदक की अभिकल्पक (डिज़ाइनर) 


श्रीमती सावित्री बाई खानोलकर ने परम वीर चक्र पदक की अभिकल्पना की। उनका वे जन्म 20 जुलाई 1913 को स्विट्ज़रलैंड में, ईवावोन लिंडा मेदे दे मारोस के रूप में हुआ। कैडेट विक्रम रामजी खानोलकर से तब मिलीं, जब वे सैन्डहर्स्ट, यूनाइटेड किंगडम की रॉयल मिलिट्री एकेडमी की छुट्टियों के दौरान स्विट्ज़रलैंड की यात्रा पर गए थे। उन्हें एक दूसरे से प्रेम हो गया और बाद में उन्होंने विवाह कर लिया। आगे चलकर उन्होंने अपना नाम सावित्री बाई खानोलकर रख लिया। 


श्रीमती खानोलकर को उनके कला-कौशल और भारतीय संस्कृति के बारे में गहरा अनुराग और जानकारी रखने के कारण, पदकों की अभिकल्पना के लिए चुना गया। परम वीर चक्र की अभिकल्पना के अलावा उन्होंने युद्ध और शांति दोनों के लिए प्रमुख वीरता पदकों की अभिकल्पना की, जिनमें अशोक चक्र, महा वीर चक्र, कीर्ति चक्र, वीर चक्र एवं शौर्य चक्र भी शामिल हैं। इसके साथ ही इन्होंने जनरल सर्विस पदक –1947 की अभिकल्पना की, जिसका उपयोग 1965 तक हुआ। यह जानना रोचक है कि इनकी बेटी श्रीमती कुमुदिनी शर्मा के देवर मेजर सोमनाथ शर्मा को 1947 की बडगाम की लड़ाई के बाद, मरणोपरांत, भारत के पहले परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। श्रीमती खानोलकर का निधन 26 नवंबर 1990 को हुआ। 

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