Wednesday, March 23, 2022

जन्माष्टमी पर निबन्ध Essay on Janmashtami

जन्माष्टमी श्रीकृष्ण की जन्मतिथि है। श्रीकृष्ण का जन्म आज से लगभग 5000 वर्ष पूर्व भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी की आधी रात के समय बन्दीगृह में हुआ था। इनकी माता का नाम देवकी और पिता का नाम वसुदेव था । देवकी मथुरा के अत्याचारी राजा कंस की बहन थी। जब ज्योतिषियों ने बतलाया कि इसी देवकी का आठवाँ बालक तेरा संहार करेगा तो कंस ने वहन और बहनोई को बन्दीगृह में डाल दिया। वहाँ देवकी के जो भी बालक उत्पन्न होता, कंस उसे तुरन्त मरवा देता था। क्रमशः आठवें बालक श्रीकृष्ण की उत्पत्ति हुई। इस वार वसुदेव ने आधी रात के समय किसी प्रकार श्रीकृष्ण को गोकुल में नन्द के यहाँ पहुँचा दिया और उसी रात नन्द की पत्नी यशोदा के यहाँ उत्पन्न हुई बालिका को लाकर देवकी के पास लिटा दिया। प्रातःकाल लड़की उत्पन्न होने का समाचार पाकर निर्दय कंस ने उस कन्या का भी प्राणान्त कर दिया। बाद में श्रीकृष्ण-बलदेव ने कंस को भरी सभा में मारकर पृथ्वी का बोझ हल्का किया। श्रीकृष्ण चतुर राजनीतिज्ञ, विद्वान्, योगिराज, त्यागी. शूरवीर, योद्धा, देश का उद्धार करने वाले, सच्चे मित्र, अनुपम दानी और सेवाभाव के आदर्श उदाहरण थे। दुर्योधन की पराजय, कंस, शिशुपाल, जरासन्ध आदि का नाश, अर्जुन को गीता का उपदेश, सुदामा की सहायता और युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में अतिथियों के पाँव धोना आदि कार्य श्रीकृष्ण की महत्ता को प्रकट करते थे। श्रीकृष्ण न होते तो भारतवर्ष आज से पाँच हजार साल पहले ही पराधीन हो गया होता। श्रीकृष्ण के इन उपकारों को स्मरण करने के लिए और जाति में नया जीवन फूंकने के लिए कन्माष्टमी मनायी जाती है। जन्माष्टमी के दिन लोग उपवास रखते हैं। मन्दिरों को सजाते हैं । राग-रंग करते हैं। श्रीकृष्ण की मूर्तियों की स्थापना करते हैं। उन्हें वस्त्रों और आभूषणों से सजाते हैं । अवतारभावना से उनकी पूजा करते हैं। विजली की चकचौंध करने वाला प्रकाश करते हैं। आधी रात के समय जब श्रीकृष्ण के जन्म का समय होता है तो आरती करके कुछ खाते हैं। श्री के प्रति श्रद्धा के फूल चढ़ाने का यह रोचक ढंग है। लोगों में श्रीकृष्ण के गुणों को जानने, अपनाने और उन पर अमल करने की भावना उत्पन्न होती है।

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