Tuesday, March 22, 2022

गणतन्त्र दिवस पर निबन्ध Essay on Republic day

26 जनवरी, 1930 से प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिन राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाने लगा। स्वाधीनता के बाद २६ जनवरी, 1950 को भारत गणतन्त्र (रिपब्लिक) बना। उसके बाद 26 जनवरी को गणतन्त्र उत्सव के रूप में प्रति वर्ष यह दिवस मनाया जाता है। 


26 जनवरी के दिन नयी दिल्ली में प्रभातकाल से ही लोग एकत्र होने लगते हैं। लाखों की संख्या में बाल, वृद्ध, स्त्रीपुरुष इण्डिया गेट के पास एकत्र होते हैं । सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहने किलकारियाँ मारते बच्चे, हँसती-गाती स्त्रियाँ, उत्साह से भरे नवयुवक और स्वतन्त्रता के सुख में मग्न पुरुष, राष्ट्रपति की सवारी की प्रतीक्षा करते हैं। आठ बजे के लगभग सुसज्जित घोड़ों की बग्घी में राष्ट्रपति की सवारी निकलती है। जल, थल तथा वायु सेना के सैनिक मार्च करते हुए उनके पीछे-पीछे चलते हैं। तब तोपों से राष्ट्रपति को सलामी दी जाती है। उसके अनन्तर पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिमी बंगाल आदि सभी प्रदेशों की झाँकियाँ निकलती हैं। इनसे उन प्रान्तों की सभ्यता, कला-कौशल, वेशभूषा, रहन-सहन आदि का परिचय दिया जाता है। इसके पीछे-पीछे जल, थल, वायु तीनों सेनाओं की टुकड़ियाँ मार्च करती हुई निकलती हैं। इनके पीछे स्कूलों-कालेजों के छात्र-छात्राओं की टुकड़ियाँ क्रीड़ा, नृत्य, गायन तथा खेल करती हुई निकलती हैं। 


रात्रि के समय रामलीला ग्राउण्ड में आतिशबाजी से जनता का मनोरंजन किया जाता है। 


यह दिन हमारे देशवासियों के लिए बड़ा पवित्र है। अतः प्रत्येक नर-नारी को इसमें पूर्ण सहयोग देना चाहिए। क्योंकि इस प्रकार के त्योहार देश, जाति एवं युवक-युवतियों में उत्साह बढ़ाने के लिए होते है ।

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