इंग्लैण्ड में माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था Secondary Education in England
1944 के शिक्षा अधिनियम के द्वारा इंग्लैण्ड में माध्यमिक शिक्षा Secondary Education in England को पुनर्गठित करके समस्त विद्यालयों को तीन वर्गों में विभक्त कर दिया गया था। इनके अन्तर्गत प्राविधिक विद्यालयों एवं माध्यमिक मॉडर्न विद्यालयों ने भी माध्यमिक शिक्षा Secondary Education के विकास में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। निम्नलिखित पंक्तियों में इन दोनों प्रकार के विद्यालयों पर संक्षेप में प्रकाश डाला गया
माध्यमिक एवं प्राविधिक विद्यालय
20वीं शताब्दी में यूरोप में विभिन्न क्रान्तिकारी परिवर्तन हुए जिनके प्रभावस्वरूप वहाँ की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक स्तर पर अनेक परिवर्तन किए गए। प्राविधिक एवं तकनीकी शिक्षा पर इस युग में विशेष बल दिया। इंग्लैण्ड में भी इस प्रकार के स्कूलों की आवश्यकता का अनुभव किया गया, जो जूनियर प्राविधिक स्कूल के विद्यार्थियों को प्राविधिक एवं तकनीकी शिक्षा प्रदान कर सकें। स्पेंस रिपोर्ट में भी यह संस्तुति की गई कि इंग्लैण्ड एवं वेल्स में जूनियर प्राविधिक स्कूल के विद्यार्थियों को व्यापक स्तर पर हायर प्राविधिक शिक्षा प्रदान करने हेतु, स्कूलों की स्थापना की जाए। जूनियर प्राविधिक स्कूल इंग्लैण्ड में पहले से ही विद्यमान थे। उनमें विद्यार्थियों को दो तीन वर्ष की शिक्षा प्रदान की जाती थी। अतः सन् 1944 के बटलर अधिनियम के आधार पर प्राविधिक शिक्षा प्रदान करने वाले माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना की गई और उन्हें 'माध्यमिक प्राविधिक स्कूल' के नाम से सम्बोधित किया गया। जो विद्यार्थी उद्योग-धन्धों अथवा किसी अन्य तकनीकी कार्य के आधार पर जीविकोपार्जन करते हैं, उन्हें 13 वर्ष की आयु में एक प्रवेश परीक्षा के आधार पर इन विद्यालयों में प्रवेश प्रदान किया जाता है। तकनीकी विषयों में विशिष्ट अभिरुचि रखने वाले विद्यार्थियों को इन विद्यालयों में प्रवेश के समय प्राथमिकता दी जाती है। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को सामान्य शिक्षा के साथ-साथ कृषि, तकनीक अथवा किसी व्यवसाय से सम्बन्धित विषय की शिक्षा दी जाती है। सन् 1959 में प्राप्त प्रदत्तों के आधार पर यह सिद्ध हुआ है कि इन विद्यालयों का महत्त्व पूर्व की अपेक्षा कुछ कम हुआ है क्योंकि वहाँ इन विद्यालयों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई है। केवल छात्र-छात्राओं की संख्या में कुछ वृद्धि अवश्य हुई है। इन माध्यमिक प्राविधिक विद्यालयों के महत्त्व को कम करने में, आधुनिक माध्यमिक विद्यालयों तथा व्यापक माध्यमिक विद्यालयों को भी कारणस्वरूप स्वीकार किया जा रहा है। परन्तु प्रत्यक्ष रूप में इन विद्यालयों के महत्त्व में कमी आने का एक प्रमुख कारण यह है कि ये विद्यालय अपने स्वतन्त्र-भवनों का निर्माण नहीं कर सके हैं और उनमें शिक्षकों की अपेक्षित संख्या भी उपलब्ध नहीं है। प्राविधिक विद्यालयों में ही अधिकांशत: इन विद्यालयों की कक्षाएं संचालित होती हैं तथा इन्हीं विद्यालयों के प्रौढ़ शिक्षा सम्बन्धी उपकरणों को, विद्यार्थियों हेतु प्रयुक्त किया जाता है। साथ ही इन विद्यालयों के शिक्षक, अधिकांशतः प्रौढ़ों को शिक्षा प्रदान करने में ही संलग्न रहते हैं। इस प्रकार माध्यमिक प्राविधिक विद्यार्थियों की उपर्युक्त स्थिति से यह स्पष्ट है कि ग्रामर विद्यालयों की अपेक्षा इन विद्यालयों का महत्त्व कम होता जा रहा है तथा जनता का उनके प्रति आकर्षण, पूर्व की अपेक्षा पर्याप्त कम हुआ है। फिर भी तकनीकी विकास की दृष्टि से इन विद्यालयों का ब्रिटेन की शिक्षा में पर्याप्त योगदान रहा है। साथ ही से विद्यालय विद्यार्थियों को रॉयल सोसायटी ऑफ आर्ट्स, प्राविधिक एवं वाणिज्य प्रमाण-पत्र परीक्षा तथा विश्वविद्यालयी शिक्षा हेतु भी तैयार करते हैं। विभिन्न प्राविधिक महाविद्यालयों में प्रवेश प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अधिकांशतः इन्हीं विद्यालयों से उपाधि प्राप्त करके आते हैं।
माध्यमिक मॉडर्न विद्यालय
बटलर अधिनियम के आधार पर इंग्लैण्ड में ग्रामर स्कूलों एवं माध्यमिक प्राविधिक विद्यार्थियों के अतिरिक्त माध्यमिक विद्यालयों की भी स्थापना की गई। विद्यार्थियों को सामान्य एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करने की दृष्टि से इन विद्यालयों ने ब्रिटेन की शिक्षा-व्यवस्था में पर्याप्त ख्याति अर्जित की है। इन स्कूलों में 4 वर्षीय पाठ्यक्रम का प्रावधान है। पाठ्यक्रम का गठन करने एवं शिक्षण की विभिन्न प्रणालियों को विकसित करने में मनोवैज्ञानिक सिद्धान्तों को महत्त्व प्रदान किया गया है। छात्रों के स्तर, बुद्धि एवं रुचि को ध्यान में रखते हुए उन्हें मॉडर्न विद्यालयों में शिक्षा प्रदान की जाती है। इन विद्यालयों के पाठ्यक्रम के अनुसार प्रारम्भिक दो वर्षों में ग्रामर स्कूलों के समान ही विद्यार्थियों को सामान्य शिक्षा प्रदान की जाती है। तीसरे एवं चौथे वर्ष छात्रों की अभिरुचि के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्था की गई है। व्यावसायिक शिक्षा के अनन्तर, यह विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है कि सम्बन्धित विषय में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के उपरान्त, विद्यार्थी भविष्य में सम्बन्धित व्यवसाय में जीविकोपार्जन कर सकें। अधिकांशत: इस प्रकार की शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों को उनके क्षेत्र में ही नौकरियाँ प्राप्त हो जाती हैं। इस प्रकार इन विद्यालयों में छात्रों के सामान्य शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ, उन्हें अपने जीवन की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण समस्या का समाधान करने हेतु ही तैयार किया जाता है और वे किसी-न-किसी व्यवसाय में पारंगत होकर नौकरी प्राप्त करने में सफलता प्राप्त कर लेते हैं। वस्तुत: इन विद्यालयों में अन्य विद्यालय की अपेक्षा छात्रों के सर्वांगीण विकास पर अधिक ध्यान दिया गया। कला, शिल्प, गृह-शिल्प अभियन्त्रण कृषि, उद्यान शिल्प, संगीत आदि अनेक क्षेत्रों में औद्योगिक एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करके, इन विद्यालयों ने जनसाधारण की ज्वलन्त समस्याओं का समाधान किया तथा माध्यमिक शिक्षा Secondary Education के क्षेत्र में पर्याप्त सराहना प्राप्त की। सन् 1945 में सीनियर प्रारम्भिक शिक्षा को आधुनिक बनाने हेतु सन् 1944 के अधिनियम के आधार पर स्थापित इन विद्यालयों ने, माध्यमिक शिक्षा Secondary Education के क्षेत्र में अत्यन्त तीव्र गति से प्रगति की।
इन विद्यालयों ने सामान्य शिक्षा प्रमाण-पत्र दिलाने की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। युद्ध-विद्या प्रमाण-पत्र, रॉयल सोसायटी ऑफ आर्ट्स, वाणिज्य प्रमाण-पत्र व प्राविधिक प्रमाण-पत्रों की तैयारी कराने के साथ ही ये विद्यार्थियों को सामान्य प्रमाण-पत्र परीक्षाओं हेतु भी तैयारी कराते हैं। साथ ही अनेक विद्यार्थियों को सशस्त्र सेनाओं तथा डॉकयार्ड की परीक्षाओं में बैठने की तैयारी भी, इन विद्यालयों के द्वारा कराई जाती है। 4 वर्षीय पाठ्यक्रम की शिक्षा समाप्त करने के उपरान्त ही विद्यार्थी माध्यमिक मॉडर्न विद्यालयों की परीक्षाओं में बैठ सकते हैं तथा इनका प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकते हैं।
द्वि-भुज एवं व्यापक विद्यालय
सन् 1957 तक इंग्लैण्ड में माध्यमिक शिक्षा Secondary Education in England के क्षेत्र में चार प्रकार के आधुनिक माध्यमिक विद्यालय विद्यमान थे—
(1) असामान्य पाठ्यक्रम के माध्यमिक आधुनिक विद्यालय,
(2) सामान्य शिक्षा एवं विशिष्ट शिक्षा के आधुनिक विद्यालय,
(3) सीनियर प्राथमिक विद्यालय, तथा
(4) मूल विषयों की अग्रिम शिक्षा देने वाले आधुनिक विद्यालय। इन सभी प्रकार के विद्यालयों में इनके स्वरूप के अनुसार विभिन्न प्रकार की सामान्य अथवा विशिष्ट अथवा दोनों ही प्रकार की शिक्षा प्रदान की जाती थी। विशिष्ट पाठ्यक्रमों के विकास होने के परिणामस्वरूप इन विद्यालयों की प्रगति धीरे-धीरे कम होनी प्रारम्भ हो गई तथा सन् 1945 के उपरान्त उपर्युक्त समस्त प्रकार के विद्यालय द्वि-भुज विद्यालयों के रूप में परिवर्तित हो गए। इन विद्यालयों का संक्षिप्त उल्लेख निम्नलिखित पंक्तियों में किया गया है
द्वि-भुज विद्यालयों से आशय उन विद्यालयों से है, जिनमें किन्हीं दो प्रकार के विद्यालयों; यथा-ग्रामर माध्यमिक विद्यालय एवं आधुनिक प्राविधिक विद्यालय के पाठ्यक्रम को समन्वित करके, व्यापक स्तर पर माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना की जाती है एवं छात्रों को माध्यमिक शिक्षा Secondary Education प्रदान की जाती है। इसी कारण इन विद्यालयों को 'व्यापक विद्यालय' भी कहा जाता था। यद्यपि इन विद्यालयों को व्यापक विद्यालय के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था क्योंकि इन विद्यालयों में व्यापक विद्यालयों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया गया था। व्यापक विद्यालय केवल उन्हीं विद्यालयों को स्वीकार किया जा सकता है, जो अपने क्षेत्र में रहने वाले समस्त प्रकार के विद्यार्थियों के लिंग-भेद का ध्यान किए बिना तथा उनकी आवश्यकताओं, क्षमताओं एवं स्तर के अनुकूल सामान्य शिक्षा प्रदान करते हैं। इस प्रकार की आवश्यकताओं की इन विद्यालयों से पूर्ति न होने के कारण ही, अनेक अभिभावक अपने बालकों को इस प्रकार के विद्यालय में भेजने की अपेक्षा व्यक्तिगत ग्रामर स्थलों में भेजना उपयुक्त समझते हैं। इस प्रकार इन विद्यालयों को यथार्थ रूप में व्यापक विद्यालय के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इन द्वि-भुज विद्यालयों की स्थापना सन् 1950 के उपरान्त होनी प्रारम्भ हुई थी। द्वि-भुज माध्यमिक विद्यालयों में दो प्रकार के विद्यालय थे—
(1) मान्यता प्राप्त विद्यालय तथा
(2) गैर-मान्यता प्राप्त विद्यालय।
इन विद्यालयों में से अधिकांश विद्यालय, प्रारम्भ में गैर-मान्यता प्राप्त विद्यालयों के रूप में विद्यमान थे। सन् 1955 के उपरान्त इन विद्यालयों को मान्यता प्राप्त होनी प्रारम्भ हुई और द्वि-भुज माध्यमिक विद्यालयों की संख्या में वृद्धि होने लगी। यद्यपि इन विद्यालयों को ग्रामर विद्यालयों एवं आधुनिक प्राविधिक माध्यमिक विद्यालयों से भिन्न प्रदर्शित किया गया था, परन्तु वस्तुतः इनमें से अधिकांश विद्यालय ग्रामर एवं प्राविधिक माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम पर ही आधारित थे।
बहु-भुज एवं अन्य माध्यमिक विद्यालय
इंग्लैण्ड में, द्वि-भुज विद्यालयों के अतिरिक्त; बहु-भुज विद्यालयों में भी छात्रों को माध्यमिक शिक्षा Secondary Education प्रदान की जाती है। ये विद्यालय अपेक्षाकृत कम प्रचलित हैं। इसका कारण यह है कि इनमें विविध प्रकार के विद्यालयों का समन्वित पाठ्यक्रम सम्मिलित किया गया है। परन्तु व्यावहारिक दृष्टि से समस्त प्रकार पाठ्यक्रमों की समुचित व्यवस्था करना अत्यन्त कठिन कार्य है। बहु-भुज विद्यालयों के अतिरिक्त इंग्लैण्ड में कुछ अन्य प्रकार के विद्यालय भी हैं; यथा-इण्टरमीडिएट विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय तथा उच्चतर श्रेणी स्कूल आदि। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्रवेश-परीक्षा अथवा बिना प्रवेश परीक्षा के आधार पर चयनित किया जाता है। अधिकांशतया योग्यता के आधार पर इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्रवेश मिलता है। शैक्षिक दृष्टि से इन विद्यालयों का पाठ्यक्रम; ग्रामर स्कूलों की तुलना में निम्नतर है। सन् 1958 के मन्त्रालय प्रतिवेदन के आधार पर इन तीनों प्रकार के विद्यालयों को ही माध्यमिक विद्यालयों के अन्तर्गत ही सम्मिलित किया गया है। इसके अतिरिक्त सन् 1957 में लिसेस्टर शायर में किए गए प्रयोग के आधार पर माध्यमिक विद्यालयों को दो वर्गों में विभक्त किया गया है—निम्नतर व्यापक माध्यमिक विद्यालय तथा उच्चतर व्यापक माध्यमिक विद्यालय। प्रथम प्रकार के विद्यालयों में 14 से 15 वर्ष की अवस्था तक तथा उच्चतर व्यापक माध्यमिक विद्यालयों में 15 वर्ष की आयु के उपरान्त शिक्षा प्रदान की जाती है। निम्नतम व्यापक माध्यमिक विद्यालय में उन छात्रों को प्रवेश प्राप्त होता है, जो प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करके आते हैं। उच्चतर व्यापक माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अग्रिम शिक्षा प्रदान की जाती है।
उपर्युक्त विवरण के आधार पर यह ज्ञात होता है कि इंग्लैण्ड में माध्यमिक शिक्षा Secondary Education in England प्रदान करने हेतु विभिन्न प्रकार के विद्यालयों की व्यवस्था की गई है। इन समस्त विद्यालयों में अधिकांशत: ग्रामर, माध्यमिक एवं मॉडर्न, प्राविधिक विद्यालय ही प्रचलित हैं। शिक्षा के द्वि-भुज एवं बहु-भुज विद्यालयों के अन्तर्गत, इंग्लैण्ड में मॉडर्न विद्यालयों की संख्या सर्वाधिक है। मॉडर्न विद्यालयों के उपरान्त ग्रामर स्कूलों को महत्त्व प्रदान किया जाता है।
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